अदाणी पोर्ट्स ने 2,800 करोड़ रुपये में विश्वसमुद्र होल्डिंग्स की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के किया

Category : बिजनेस, खेल, | Sub Category : सभी Posted on 2021-04-05 13:11:35


अदाणी पोर्ट्स ने 2,800 करोड़ रुपये में विश्वसमुद्र होल्डिंग्स की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के किया

अदाणी पोर्ट्स ने 2,800 करोड़ रुपये में विश्वसमुद्र होल्डिंग्स की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के किया
- अधिग्रहण से कृष्णापत्तनम पोर्ट में अपना स्वामित्व 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया.
- कृष्णापट्टनम पोर्ट के 100 प्रतिशत अधिग्रहण का अर्थ वित्त वर्ष 2011 के ईबीआईटीडीए पर 10.3 गुना के मल्टिपल्स और शेयरधारक वैल्यू में वृद्धि है.
- कृष्णापत्तनम पोर्ट भारत का दूसरा सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का बंदरगाह है, जिसमें 300 एमएमटीपीए की मास्टर प्लान क्षमता के साथ विकास करने की मजबूत क्षमता है.
भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स कंपनी और डायवर्सिफाइड अदाणी ग्रुप की प्रमुख परिवहन शाखा, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड),ने अदाणी कृष्णापत्तनमपोर्ट लिमिटेड, (कृष्णापत्तनम पोर्ट) में 2,800 करोड़ रुपये में रेजिडुअल 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण की घोषणा की है. इस अधिग्रहण से कृष्णापत्तनम पोर्ट में एपीएसईजेड की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगी.
अक्टूबर 2020 में अधिग्रहित किए गए 75 प्रतिशत स्वामित्व के साथ, अधिग्रहण का अर्थ 10.3 गुने के मल्टिपल्स वाले ईवी वित्त वर्ष 21 के ईबीआईटीडीए सहित 13,675 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू से है.
कृष्णापत्तनम पोर्ट (चेन्नई पोर्ट्स से 180 किमी की दूरी पर) आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा के करीब आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में भारत के पूर्वी तट पर स्थित है. कृष्णापत्तनम पोर्ट एक सभी मौसम में सक्रिय रहने वाला, गहरे पानी वाला बंदरगाह है, जिसकी 64 एमएमटीपीए की वर्तमान क्षमता वाली मल्टी-कार्गो सुविधा है. 20 किमी के वाटरफ्रंट और 6,800 एकड़ भूमि सहित, कृष्णापत्तनम पोर्ट में 300 एमएमटीपीए की मास्टर प्लान क्षमता है और 50 साल की रियायत प्राप्त है.
इस पोर्ट से वित्त वर्ष 21 में 38 एमएमटी वॉल्यूम, 1,840 करोड़ रुपये का राजस्व और 1,325 करोड़ रुपये कर ईबीआईटीडीए हासिल होने की उम्मीद है. अधिग्रहण के बाद से कृष्णापत्तनम पोर्ट ने व्यावसायिक प्रक्रिया की पुनर्रचना पर ध्यान केंद्रित किया है जिसके परिणामस्वरूप ईबीआईटीडीए मार्जिन वित्त वर्ष 2020 के 57 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में 72 प्रतिशत हो गया है.
एपीएसईजेड के चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर एवं होलटाइम डायरेक्टर श्री करण अदाणी ने कहा कि “कृष्णापत्तनम पोर्ट में हमारा स्वामित्व एपीएसईजेड के 2025 तक 500 एमएमटी के लक्ष्य के प्रतिे लिए और भारत के पश्चिम तथा पूर्वी तटों के बीच कार्गो के बीच बराबरी लाने की हमारी व्यापक रणनीति के लिए मजबूती प्रदान करता है. कृष्णापत्तनम पोर्ट 2025 तक दोगुना ट्रैफिक संभालने की राह पर है और यह एक मल्टी-प्रॉडक्ट और कार्गो एनहांसमेंट रणनीति के जरिये नियोजित पूंजी पर रिटर्न बढ़ाते हुए, उच्च विकास प्रदान करेगा. हमें विश्वास है कि हम 2025 तक कृष्णापत्तनम पोर्ट में थू्रपुट को दोगुना और ट्रिपल ईबीआईटीडीए को तिगुना करने में सक्षम रहेंगे. हम कृष्णापत्तनम पोर्ट को दक्षिणी आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए प्रवेश द्वार बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. पोर्ट के साथ उपलब्ध बड़ी औद्योगिक भूमि के साथ हम कृष्णापत्तनम को एक मैन्यूफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेंटर बना देंगे.”
विश्व स्तर पर सक्रिय डायवर्सिफायड अदाणी ग्रुप का एक हिस्सा, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड), एक पोर्ट कंपनी से विकसित होकर भारत के पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म बन चुका है. दोनों तटीय क्षेत्रों और दूरदराज के विशाल इलाकों से कार्गो के विशाल वॉल्यूम की हैंडलिंग करते हुए, रणनीतिक रूप से मौजूद एपीएसईजेड के 12 पोर्ट और टर्मिनल के पास देश की कुल पोर्ट क्षमता का 24 प्रतिशत हैं. ये पोर्ट और टर्मिनल गुजरात में मुंद्रा, दाहेज, तुना और हजीरा, ओडिशा में धामरा, गोवा में मारमुगाओ, आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम और कृष्णापत्तनम, महाराष्ट्र में दिघी और चेन्नई में कट्टुपल्ली और एन्नोर में स्थित हैं. कंपनी केरल के विजिंजम में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट भी विकसित कर रही है. हमारे पोर्ट्स टू लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म में हमारी पोर्ट सुविधाएं, एकीकृत लॉजिस्टिक्स क्षमताएं, और औद्योगिक आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन में होने वाले संपूर्ण बदलाव से लाभ उठाने की भारत की तैयारी को देखते हुए, हमें विशेष लाभदायक स्थिति में रखते हैं. हमारी सोच अगले दशक में दुनिया का सबसे बड़ा पोर्ट और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म बनना है. 2025 तक कार्बन न्यूट्रल होने के दृष्टिकोण से, एपीएसईजेड विज्ञान आधारित लक्ष्य पहल (एसबीटीआई) के लिए हस्ताक्षर करने वाला पहला भारतीय पोर्ट और विश्व का तीसरा देश रहा, जो पूर्व-औद्योगिक स्तरों पर 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के लिए उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध रहा है.

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