एक साल बाद भी नहीं टूटा रक्तदान का विश्व रिकॉर्ड

Category : मध्यप्रदेश | Sub Category : सभी Posted on 2021-02-20 23:58:57


एक साल बाद भी नहीं टूटा रक्तदान का विश्व रिकॉर्ड

एक साल बाद भी नहीं टूटा रक्तदान का विश्व रिकॉर्ड
- आज भी मध्यप्रदेश रेडक्रॉस के नाम है गोल्ड बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड
  भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की मध्य प्रदेश शाखा द्वारा गत वर्ष शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित गतिविधियों ने कीर्तिमान स्थापित किया था. सामाजिक और चिकित्सा के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनाते हुए लगातार 24 घंटे का रक्तदान शिविर आयोजित किया. चिकित्सा और ब्लड डोनेशन के प्रति लोगों में जागरूक करने का रेडक्रॉस के प्रयास से कोरोना काल में बहुत मदद मिली थी. कोरोना संक्रणण के दौर में प्रदेश में रक्तदान की ऐसी व्यवस्था बनी कि लोगों को आसानी से रक्त की उपलब्धता हो सकी.  
म प्र  रेडक्रॉस सोसायटी ने साल 2020 में 20 फरवरी को सुबह 6 पर रक्तदान शिविर का शुरु किया था जिसका समापन शुक्रवार सुबह ठीक 6 बजकर तक हुआ. खास बात यह थी कि पूरे शिविर में आने वाले ब्लड डोनर्स का रिकॉर्ड और सत्यापन गोल्डन बुक ऑफ वर्ड रिकॉर्ड के एशिया प्रमुख डॉ. मनीष विश्नोई की निगरानी में किया गया. इस शिविर में भोपाल शहर के विभिन्न समाजिक वर्गों द्वारा उत्साहपूर्वक रक्तदान किया था. रक्तदान के वल्र्ड रिकॉर्ड शिविर की रिकॉर्डिंग कैमरे द्वारा की गई थी.
म प्र  रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन श्री आशुतोष पुरोहित ने बताया रेडक्रॉस के रक्तदान शिविर का सबसे बड़ा लाभ कोरोना संकट के समय देखने को मिला. इस रिकॉर्ड से पूरी रेडक्रॉस की टीम में नई ऊर्जा का संचार हुआ. कोरोना  संक्रमण के दौरान जब लोग घरों में बंद थे, तब रेडक्रॉस की पूरी टीम अपनी जान जोखिम में डालकर जनहित के लिये काम कर रही थी. वल्र्ड रिकॉर्ड जैसे पुरुस्कार मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि काम करने वाले लोगों को लगता ही कि उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों को पहचान मिली है. यही वजह है कि कोरोनाकाल के दौर में देश में हरियाण के बाद सेवा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश रेघ्डक्रॉस दूसरे स्थान पर रहा.
म प्र  रेडक्रॉस सोसायटी की महासचिव डा. प्रार्थना जोशी ने बताया कि गत वर्ष की तरह मध्य प्रदेश रेडक्रॉस आगे भी इस तरह के आयोजन की दिशा में कार्य  कर रहा है. खुशी की बात यह है कि गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने के बाद रेड क्रॉस अस्पताल के डॉक्टर्स और कर्मचारियों को समाजहित में काम करने की नई ऊर्जा दी है. इसके साथ ही शिविर में कई ऐसे साथियों ने रक्तदान किया जो कई सालों से अस्पताल और चिकित्सा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे थे. लेकिन जागरूकता के अभाव में कभी रक्तदान नहीं किया. 

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