भ्रष्टाचार पर नकेल की नई उम्मीद. (संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार भोपाल) 30 मार्च.

Category : आजाद अभिव्यक्ति | Sub Category : सभी Posted on 2022-03-30 01:43:14


भ्रष्टाचार पर नकेल की नई उम्मीद.  (संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार भोपाल) 30 मार्च.

पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक साथ कई चौंकाने वाली घोषणा की हैं. इनमें दो प्रमुख हैं. एक तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ जंग का एलान कर दिया है और कहा है कि उनकी सरकार का खास प्रयास होगा, इस समस्या का समाधान. इसके लिए बाकायदा जनता को रिश्वत मांगने वालों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने और सीधे सीएम को व्हाट्सएप करने की व्यवस्था की बात भी कही गई है. दूसरी, पूर्व विधायकों की पेंशन बंद करने की.
पहली घोषणा की बात करें तो आम आदमी पार्टी का जन्म ही भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से हुआ था. अन्ना के नेतृत्व में लोकपाल व्यवस्था को लेकर जो आंदोलन हुआ, उसमें अरविंद केजरीवाल शामिल हुए. यह बात और है कि बाद में वे आंदोलन से अलग भी हट गए. लेकिन उनकी आप पार्टी ने दिल्ली में भी कुछ ऐसे काम किए कि उन्हें फिर से सरकार में आने का मौका मिल गया. यही नहीं, दिल्ली के आधार पर ही शायद पंजाब में भी उन्हें जनता ने सत्ता संभालने का अवसर दिया है.
देश के विभिन्न राज्यों का हाल यह है कि अभी तो रोज खबरों में कम से कम दो किस्से रिश्वतखोरों के पकड़े जाने के होते हैं. 500 रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक की रिश्वत और एक कॉन्स्टेबल से लेकर संस्थान के निदेशक तक की रिश्वतखोरी सामने आती है. मध्यप्रदेश में तो पांच हजार रुपए वेतन पाने वाला कर्मचारी भी करोड़ों का निकलता है. सीधी बात है, कोई भी वर्ग और क्षेत्र इससे अछूता नहीं है. कुछ ही दिन पहले सीबीआई ने गेल यानि गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के निदेशक रंगनाथन को 50 लाख से अधिक की रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया था. यह एक उदाहरण भर है.
लगभग दो साल पहले ग्लोबल सिविल सोसायटी ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा किए गए एक सर्वे की रिपोर्ट- ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर-एशिया में यह सामने आया था कि रिश्वतखोरी की दर भारत में सबसे आगे यानि 39 प्रतिशत है. वहीं रिश्वतखोरी के मामलों का आंकलन करने वाली संस्था ट्रेस द्वारा वर्ष 2021 में की गई रैंकिंग में 194 वें देशों में भारत का नम्बर 82वां रहा. जबकि इसके पूर्व भारत 77 वें नम्बर पर था. मतलब साफ है कि रिश्वतखोरी पर कोई भी अंकुश लगा पाने में कानून और व्यवस्था दोनों फेल रहे हैं. हमारी केंद्र सरकार में बैठे लोग तो यह कहते ह ैं-न खाएंगे, न खाने देंगे. वो खा रहे हैं, यह तो दावा नहीं किया जा सकता, लेकिन केंद्र सरकार का भी कोई विभाग ऐसा नहीं है, जहां भ्रष्टाचार नहीं हो. जहां रिश्वत नहीं ली जाती हो. मध्यप्रदेश में तो इन दिनों अराजक भ्रष्टाचार का दौर चल रहा है.
कहने को तमाम फिल्मों से लेकर टीवी सीरियल में मनोरंजन के जरिए भ्रष्टाचार की समस्या को तरह-तरह से पेश किया जाता है. ये बात कहने में भले ही नाटकीय लगे लेकिन बहुत ही बड़ा प्रश्न खड़ा करती है, क्या इस बारे में सोचना जरूरी नहीं कि रिश्वतखोर व्यक्ति के पीछे उसके घर के लोग और उनका दबाव बड़ा कारण हो सकते हैं?
कुछ महीने पहले उत्तरप्रदेश के इत्र कारोबारी पीयूष जैन की चर्चा देशभर में रही. बताया गया कि उनके घर की दीवारों व अन्य जगहों से 184 करोड़ कैश, 23 किलो सोना और अन्य सामान मिला. इतना धन देखकर जांच और रेड में शामिल अधिकारी भी सकते में थे. दीवारों से टपकती उन नोटों की गड्डियों को देखकर क्या ऐसा नहीं लगा कि सरकारें तब ही जागती हैं, जब उनके विरोधियों को खत्म करना होता है?
भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, ऊपरी कमाई का लालच या रातों-रात अथाह सम्पत्ति खड़ी कर लेना आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. ये एक ही लक्ष्य के अलग अलग शॉर्टकट्स हैं. हालांकि वो रास्ता है, जिसकी मंजिल आखिरकार जेल या किसी न किसी सजा तक जाकर ही खत्म होती है. कुछ लोगों के साथ ऐसा कुछ नहीं होता, और वे ही भ्रष्टाचार के अनुप्रेरक बन जाते हैं. और इनमें घर-परिवार के या करीब के लोग भी शामिल होते हैं. गलत तरीके से कमाने वाला व्यक्ति अधिकांश मामलों में जिंदगी भर डर और झूठे ओवरकॉन्फिडेंस के साथ जीता है. डर पकड़े जाने का और झूठा ओवरकॉन्फिडेंस उस डर को छुपाने का. यही कारण था कि पीयूष जैन पुरानी बाइक पर ही चला करता था. लेकिन या तो वह परिवार के कारण यह सब करता है या फिर उसकी आदत पड़ जाती है. यह आदत किसी बड़ी बीमारी से कम नहीं होती, क्योंकि इसके बिना उसे नींद नहीं आती.
सरकारी दफ्तर और उसमें काम करने वाले लोगों को लेकर अक्सर हमारे मन में एक धारणा होती है कि वहां कुछ दिए बिना काम नहीं होगा. जो व्यवस्था बनी हुई है सालों से वो ऐसी ही तस्वीर पेश करती है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि इस व्यवस्था को बढ़ावा कौन देता है? हम जल्दी जाने के चक्कर में सिग्नल पर खड़े सिपाही के हाथ में 50 या सौ का नोट पकड़ाते हैं. लाइन में लगकर दर्शन करने की बजाय किसी भी तरह जुगाड़ करके वीआईपी दर्शन करते हैं. अपना काम पहले और थोड़े हेर-फेर के साथ करने के लिए फाइल पर वजन रखते हैं. तो हम ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं. भ्रष्टाचार अब हमारे देश में नमक के जैसा हो गया है. लोग इसका स्वादानुसार उपयोग करते हैं. कुछ कम खाते हैं तो कुछ ऊपर से एक्स्ट्रा डालकर.
आप पार्टी कुछ हटकर काम कर रही है, ऐसा देखने में आ रहा है. पंजाब जैसे राज्य में यदि भ्रष्टाचार पर लगाम कसने में वह कामयाब होते हैं. यदि दिल्ली जैसी शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था दे पाते हैं, जो भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण और कारक हैं, तो यह अपने आप में अन्य राज्यों के लिए नजीर बन जाएगी. उम्मीद तो कर ही सकते हैं. की जानी भी चाहिए, क्योंकि भ्रष्टाचार किसी भी समाज या देश के लिए केंसर की तरह है.

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